आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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प्रात जागरण का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (43) की व्याख्या "प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा  दधाति"ऋगुवेद-- 1/125/1भावार्थ--प्रात: जागने वाला प्रातकाल का ऐश्वर्य पाता है।मंत्र दिया है—“प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा दधा...

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महाभारत की कहानी - भाग 221 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२२५ कृष्ण वर्णित अनुगीता   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्मपरायणता...

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विचारों का संग्राम By prem chand hembram

विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित सम्पूर्ण झा के आँगन से संस्कृत श्लोकों की मधुर, स्पष्ट ध्वनि उठ रही...

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भक्त प्रह्लाद - 19 By Siya Kashyap

भगवान् नरसिंह का अवतारक्षीर सागर में लेटे भगवान् विष्णु माता लक्ष्मी की ओर देखकर मुसकरा रहे थे। उन्होंने माता लक्ष्मी के मुखमंडल पर चिंता की रेखाओं को देखते हुए कहा, “क्या बात है म...

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प्रकाश की ओर बढ़ो। By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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जल-छाया By Makvana Bhavek

जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग म...

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अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (65) की व्याख्या "उत्सं दुहन्ति"ऋगुवेद --9/112/1भावार्थ --अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो। उत्सं दुहन्ति” (ऋग्वेद 9.112.1)इसका अर्थ समझने के लिए शब्दों और प्रसंग दोनों...

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अन्दर से विश्वास उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद  सूक्ति-- (64)की व्याख्या "विश्वासं धेहि"ऋगुवेद --10/48/5भावार्थ --मन में विश्वास स्थापित करो। ऋग्वेद 10/48/5 — पूरा मंत्रमंत्र (संस्कृत):विश्वासं धेहि मे मनो यथा त्वं मघवन्...

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मन को स्थिर रखकर सत्य को जानना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर रखो।मंत्र:“धियं धारय” — ऋग्वेद 8.1.5 शब्दार्थ--धियं (धियः) = बुद्धि, मन, विचारशक्ति।धारय = ध...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 72 By CHIRANJIT TEWARY

वामन देवता के पैर बिल्कुल छौटे छोटे थे। जिसे दैखकर राजा बली हैरान होकर कहने लगे। " हे वामन देवता आपके अपने लिए मात्र तीन पैर जमीन मांगना जिसे सुनकर मुझे बड़ा आश्चर्य लगा क्योकी आपक...

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हार मत मानो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (62) की व्याख्या "न मृष्यसे"ऋगुवेद --1/116/2हार मत मानो। सामना करो।“न मृष्यसे” (ऋग्वेद 1/116/2) का अर्थ थोड़ा सूक्ष्म है, इसलिए इसे सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है।श...

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व्याख्या ऋगुवेद की By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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बच्चों से प्रेम या धोखा ? By prem chand hembram

  बच्चों से प्रेम या धोखा ?यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर लगभग हर कोई “हाँ” में देता है।लेकिन यदि हम वास्तव में अपने बच्चों से प्रेम करते हैं,तो फिर क्यों आए दिन हमारे ही बच्चे किसी...

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शक्ति धारण करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(60) की व्याख्या "श्रेष्ठ यश:"ऋगुवेद --4/33/11भावार्थ --श्रेष्ठ यश प्राप्त करो। ऋग्वेद 4/33/11 में “श्रेष्ठ यश:” का भाव वास्तव में मनुष्य को उच्च जीवन-मूल्यों की ओर प...

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 8 By Prashanth B

रविवार की सुबह। विक्रम के घर में एक शांत और आरामदायक माहौल था। उसके पिता अखबार पढ़ रहे थे और माँ रसोई में हल्के-फुल्के काम में व्यस्त थीं।तभी गेट की घंटी बजी।"विक्रम! तुम्हारे दोस्...

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सनातन एक़ जीवंत धारा By prem chand hembram

सनातन एक जीवंत धारा क्या मनुष्य की पहचान उसकी जाति से है?क्या वह उसके सम्प्रदाय से तय होती है?या फिर उससे भी कोई गहरा सत्य है—जो हर मानव के भीतर समान रूप से विद्यमान है?मेरे चिंतन...

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चरैवेति चरैवेति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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यज्ञोपवीत जनेऊ क्या है ? क्यों पहना जाता है ? By Abhishek Chaturvedi

यज्ञोपवीत जनेऊ क्या है ? क्यों पहना जाता है ?आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे से दाएं बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को जनेऊ अथवा यज्ञोपवीत कहते हैं।जनेऊ...

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ध्वनि का विज्ञान : एकं पूर्ण समाधान By prem chand hembram

ध्वनि का विज्ञान: एक पूर्ण समाधान आज के समय में मानवता शांति की खोज में है।मेडिटेशन ऐप्स से लेकर न्यूरोसाइंस प्रयोगशालाओं तक,थेरेपी कक्षों से लेकर आध्यात्मिक शिविरों तक—हर कोई मन क...

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प्राचीन ज्ञान और आधुनिक चेतना के बीच एक नया संवाद - 3 By Vedanta Life Agyat Agyani

  वेदांत 2.0 लाइफ चेतना का सार्वभौमिक दर्शन अज्ञात अज्ञानी                 अनुक्रमणिका  प्रस्तावनाचेतना की खोज और वेदांत 2.0 लाइफ का जन्म भाग 1 — पारंपरिक वेदांत (Vedanta 1.0 old...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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प्रात जागरण का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (43) की व्याख्या "प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा  दधाति"ऋगुवेद-- 1/125/1भावार्थ--प्रात: जागने वाला प्रातकाल का ऐश्वर्य पाता है।मंत्र दिया है—“प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा दधा...

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महाभारत की कहानी - भाग 221 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२२५ कृष्ण वर्णित अनुगीता   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्मपरायणता...

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विचारों का संग्राम By prem chand hembram

विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित सम्पूर्ण झा के आँगन से संस्कृत श्लोकों की मधुर, स्पष्ट ध्वनि उठ रही...

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भक्त प्रह्लाद - 19 By Siya Kashyap

भगवान् नरसिंह का अवतारक्षीर सागर में लेटे भगवान् विष्णु माता लक्ष्मी की ओर देखकर मुसकरा रहे थे। उन्होंने माता लक्ष्मी के मुखमंडल पर चिंता की रेखाओं को देखते हुए कहा, “क्या बात है म...

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प्रकाश की ओर बढ़ो। By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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जल-छाया By Makvana Bhavek

जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग म...

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अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (65) की व्याख्या "उत्सं दुहन्ति"ऋगुवेद --9/112/1भावार्थ --अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो। उत्सं दुहन्ति” (ऋग्वेद 9.112.1)इसका अर्थ समझने के लिए शब्दों और प्रसंग दोनों...

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अन्दर से विश्वास उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद  सूक्ति-- (64)की व्याख्या "विश्वासं धेहि"ऋगुवेद --10/48/5भावार्थ --मन में विश्वास स्थापित करो। ऋग्वेद 10/48/5 — पूरा मंत्रमंत्र (संस्कृत):विश्वासं धेहि मे मनो यथा त्वं मघवन्...

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मन को स्थिर रखकर सत्य को जानना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर रखो।मंत्र:“धियं धारय” — ऋग्वेद 8.1.5 शब्दार्थ--धियं (धियः) = बुद्धि, मन, विचारशक्ति।धारय = ध...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 72 By CHIRANJIT TEWARY

वामन देवता के पैर बिल्कुल छौटे छोटे थे। जिसे दैखकर राजा बली हैरान होकर कहने लगे। " हे वामन देवता आपके अपने लिए मात्र तीन पैर जमीन मांगना जिसे सुनकर मुझे बड़ा आश्चर्य लगा क्योकी आपक...

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हार मत मानो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (62) की व्याख्या "न मृष्यसे"ऋगुवेद --1/116/2हार मत मानो। सामना करो।“न मृष्यसे” (ऋग्वेद 1/116/2) का अर्थ थोड़ा सूक्ष्म है, इसलिए इसे सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है।श...

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व्याख्या ऋगुवेद की By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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बच्चों से प्रेम या धोखा ? By prem chand hembram

  बच्चों से प्रेम या धोखा ?यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर लगभग हर कोई “हाँ” में देता है।लेकिन यदि हम वास्तव में अपने बच्चों से प्रेम करते हैं,तो फिर क्यों आए दिन हमारे ही बच्चे किसी...

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शक्ति धारण करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(60) की व्याख्या "श्रेष्ठ यश:"ऋगुवेद --4/33/11भावार्थ --श्रेष्ठ यश प्राप्त करो। ऋग्वेद 4/33/11 में “श्रेष्ठ यश:” का भाव वास्तव में मनुष्य को उच्च जीवन-मूल्यों की ओर प...

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 8 By Prashanth B

रविवार की सुबह। विक्रम के घर में एक शांत और आरामदायक माहौल था। उसके पिता अखबार पढ़ रहे थे और माँ रसोई में हल्के-फुल्के काम में व्यस्त थीं।तभी गेट की घंटी बजी।"विक्रम! तुम्हारे दोस्...

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सनातन एक़ जीवंत धारा By prem chand hembram

सनातन एक जीवंत धारा क्या मनुष्य की पहचान उसकी जाति से है?क्या वह उसके सम्प्रदाय से तय होती है?या फिर उससे भी कोई गहरा सत्य है—जो हर मानव के भीतर समान रूप से विद्यमान है?मेरे चिंतन...

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चरैवेति चरैवेति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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यज्ञोपवीत जनेऊ क्या है ? क्यों पहना जाता है ? By Abhishek Chaturvedi

यज्ञोपवीत जनेऊ क्या है ? क्यों पहना जाता है ?आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे से दाएं बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को जनेऊ अथवा यज्ञोपवीत कहते हैं।जनेऊ...

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ध्वनि का विज्ञान : एकं पूर्ण समाधान By prem chand hembram

ध्वनि का विज्ञान: एक पूर्ण समाधान आज के समय में मानवता शांति की खोज में है।मेडिटेशन ऐप्स से लेकर न्यूरोसाइंस प्रयोगशालाओं तक,थेरेपी कक्षों से लेकर आध्यात्मिक शिविरों तक—हर कोई मन क...

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प्राचीन ज्ञान और आधुनिक चेतना के बीच एक नया संवाद - 3 By Vedanta Life Agyat Agyani

  वेदांत 2.0 लाइफ चेतना का सार्वभौमिक दर्शन अज्ञात अज्ञानी                 अनुक्रमणिका  प्रस्तावनाचेतना की खोज और वेदांत 2.0 लाइफ का जन्म भाग 1 — पारंपरिक वेदांत (Vedanta 1.0 old...

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