आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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अमृत वाणी - संत वाणी - 29 By Nitya Oswal

भारत के महाराष्ट्र के चौदहवीं शताब्दी के परम सिद्ध, विद्रोही और वारकरी संप्रदाय के महान संत चोखामेला जी की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रसिद्ध अमृत वाणी (अभंग) यहाँ दी गई है। यह वाणी...

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राधा रानी की कृपा By palak baisla

बरसाना में यमुना किनारे सावित्री नाम की एक बूढ़ी मैया रहती थी। उसका इस संसार में कोई नहीं था। पति बहुत साल पहले गुजर गए थे, बच्चे नहीं थे। उसका बस एक ही सहारा था, एक ही परिवार था -...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 37 By Shiv putri

प्रिया ,अनिरुद्ध और सार्थक की बात सुन चुकी थी उसके पैरों तले जमीन खिसक गई )(ये बात सुन के प्रिया की आंखों में अनकहा गुस्सा था उसे खुद नहीं पता था कि उसे गुस्सा क्यो आ रहा है )सार्थ...

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जब राधा रानी ने किया चमत्कार By palak baisla

वृंदावन में यमुना किनारे मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। मीरा को बचपन से ही राधा रानी से बहुत प्रेम था। वह हर दिन सुबह उठकर यमुना में स्नान करती और फिर राधा-कृष्ण के मंदिर में फूलों...

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नुआखाई (पर्व नहीं एक एहसास) By Anamika

स्मृतियों की थाली में नुआखाई का नवान्न :​भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पंचमी (गणेश चतुर्थी के अगले दिन) जब भी करीब आती है, हवा में एक सोंधी सी खुशबू घुलने लगती है। पश्चिमी ओडिशा का यह...

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कालू की पहाड़ी - 17 By RAAHULL SHARMA

पहाड़ी पर मौत का सन्नाटा और कालू का अट्टहास गूँज रहा था। दीपक और अभिलाषा कांपते हुए कातिलों की भूमिका निभा रहे थे, लेकिन तभी कार्तिक के मुँह से निकली बात ने सबको सुन्न कर दिया।कार्...

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जब भोले बाबा ने दिया वरदान By palak baisla

प्राचीन समय की बात है। हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था जिसका नाम शिवपुर था। उस गाँव में आरती नाम की एक गरीब लड़की अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी। आरती के पिता का देहांत बचप...

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प्रतीकोपासना - भाग 4 By kalpesh

प्रतीकोपासना :- संपूर्ण साधना का क्रमभाग ४ : स्वप्रतीक से चिदाकाश तकअब तक हमने प्रतीकोपासना के तीन प्रमुख चरणों को समझा है। पहले चरण में साधक अपने ही प्रतिबिंब को स्वप्रतीक बनाकर उ...

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समकालीन अद्वैत का सच: संस्था नहीं, साक्षी। By Vedanta Life Agyat Agyani

 समकालीन अद्वैत वेदान्त का दार्शनिक विश्लेषण: संस्थागत ढाँचे, तार्किक व्याख्याएँ और 'वेदान्त 2.0' का शून्य-बिंदु चेतना सिद्धांतअद्वैत वेदान्त की शास्त्रीय उपनिषदीय परंपरा म...

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फल से कारण तक - रूप के पार निराकार सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

        अध्याय : फल से कारण तक — रूप के पार निराकार सत्यबीज-वाक्य  “फल को मत पकड़ो, कारण तक जाओ।रूप को देखो, पर रूप को अंतिम सत्य मत मानो।”               1. धर्म की पहली भूल — फल क...

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जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है कर्म से दृष्टा तक By Vedanta Life Agyat Agyani

जो हो रहा है, अच्छा हो रहा हैकर्म से दृष्टा तक लेखक : Agyat Agyani प्रस्तावना — पहला सारयह पुस्तक किसी मत को स्थापित करने के लिए नहीं है। यह घटना को घटना की तरह देखना सिखाने के लिए...

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Zinagi 2.0 By Swarnima Varshney

काश कुछ ऐसा हो जाए… जो दिल को चाहिए, वही मिल जाए। कितनी खुशी होगी ना, कुछ पलों के लिए… पर ये दिल कहाँ ठहरता है एक पल के लिए। ऐसा लगता है कि जो है उसमें कुछ अधूरा है। जो मिल जाए, तो...

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एकनिष्ठ भक्ति By Shivam Kumar Pandey

 ।। धर्म कभी भी वंशानुगत नहीं होता ।। आस्था में स्पष्टता, आराध्य के प्रति निष्ठा और धार्मिक पहचान का प्रश्नएक मौलिक वैचारिक पुस्तकलेखक: Shivam Kumar Pandey इस पुस्तक का उद्देश्य अप...

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सत्य की पहली धड़कन By Vedanta Life Agyat Agyani

  1. पुस्तक विवरण - Description   Vedanta 2.0 : सत्य की पहली धड़कन   सत्य कहाँ है - बाहर दिखाई देने वाले जगत में, या उस चेतना में जिसके कारण यह जगत दिखाई देता है?   मनुष्य ने इस प्...

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प्रथमाष्टमी By Anamika

​मार्गशीर्ष का महीना जब भी आता है, मेरी स्मृतियों के आँगन में हल्दी के पत्तों की वह सोंधी खुशबू तैरने लगती है। बचपन से लेकर शादी से पहले तक, यह महीना मेरे लिए किसी उत्सव से कम नहीं...

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क्या भाग्य सच में होता है? By Nitya Oswal

हाँ, भाग्य है; वह सच में है! भाग्य कैसे सच है यह जानने के लिए, आइए वास्तविक जीवन के कुछ उदाहरण देखते हैं, शुरुआत आपके 'खुद' के जीवन से करते हैं। भाग्य के वास्तविक जीवन के उ...

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जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है? By yeash shah

_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मंत्रों में जप मंत्र मेरा ही स्वरूप है। जप का अर्थ है नित्य अपने अंतर में किसी एक विशेष संकल्प को दोहर...

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रामायण हमें क्या सिखाती है? By Skp divine

रामायण हमें क्या सिखाती है?एक महान ग्रंथ, जो मनुष्य को प्रेम, मर्यादा और धर्म का मार्ग दिखाता हैरामायण केवल एक प्राचीन कथा नहीं है।यह भारतीय संस्कृति की उन महान आध्यात्मिक और साहित...

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विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4 By Shivam Kumar Pandey

हम सभी विष्णु सरनेम के लोग, सनातन धर्म के अनुयायी हैं, और और हम हिंदुओं से अलग नहीं बल्कि हम भी हिंदू हैं । किसी भी प्रकार से हम हिंदुओं से अलग नहीं हैं ।परिचयभारत एक प्राचीन और मह...

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सत्य की ज्ञान-यात्रा - अध्याय 1 By Chandni choudhary

सत्य की ज्ञान-यात्राअभ्यनव और गुरुदेव वाजदेव ऋषि की दार्शनिक कथावन की शांत गोद में गुरुदेव वाजदेव ऋषि अपनी कुटिया के बाहर ध्यानमग्न बैठे थे। संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे अस्ता...

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तीन समस्याएं, पीड़ा का कारण और निवारण। By yeash shah

समाज की तीन समस्याएं और पीड़ा का कारण।(अ) घर में लगातार बीमारी रहना और मेडिकल का खर्च।(ब) प्रगतिशील व्यवसाय या नौकरी का अचानक कम या बंद हो जाना।(क) रिश्तों में मनभेद और अलग हो जाने...

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गरीब किसान की मेहनत और राम की लगन By Tejpal Singh Meena

मोहन एक गरीब परिवार का सीधा वक्ति हैं वह उत्तर प्रदेश मुरादाबाद के एक छोटे से गांव अमरपुर में रहता है मोहन के परिवार में चार सदस्य रहते हैं उसकी पत्नी सरोज जो घर का सारा काम करती ह...

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मेरा काम हो गया - एक जागृति कथा By prem chand hembram

पुरुलिया जिले के रूकनी गाँव के समीप हारु कमार का घर था। मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और बाँस का दरवाजा—बस यही उसकी गृहस्थी की पहचान थी।बात सन 1976 की है।हारु ने जब से होश सँभाला, त...

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श्रोत्रं यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(14) की व्याख्या "श्रोत्रंयज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/81भावार्थ--हमारे कान शुभ वचनों को ग्रहण करने वालेबनें।वेदों में प्रमाण--“हमारे कान शुभ/कल्याणकारी वचन सुनें और...

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शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है। By Vedanta Life Agyat Agyani

  शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है।जब मन कहता है—“कृष्ण ऐसे थे।”“बुद्ध ऐसे थे।”“राम ऐसे थे।”तो वह प्रायः इतिहास, स्मृति और किसी दूसरे के अनुभव को दोहरा रहा होता है...

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मैं हूँ - लेकिन कर्ता नहीं By Vedanta Life Agyat Agyani

  0 — कर्ता का अंत, होना शेष0 केवल शांति नहीं है।0 केवल विचारों का रुक जाना नहीं है।0 केवल ध्यान में बैठ जाना नहीं है।0 का मूल अर्थ है—कर्ताभाव का गिर जाना।मैं हूँ।बस हूँ।बाकी सब ह...

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उत्तर बेचने वाले गुरु और खोता हुआ प्रश्न By Vedanta Life Agyat Agyani

  उत्तर बेचने वाले गुरु और खोता हुआ प्रश्नआज आध्यात्मिक बाजार में एक विचित्र स्थिति दिखाई देती है—प्रश्न भी गुरु पैदा करता है और उसका उत्तर भी गुरु ही देता है।पहले वह तुम्हारे भीतर...

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चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सू्क्ति(13) की व्याठ्या"चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद --11/84भावार्थ --हे ईश्वर ! हमारी दृष्टि पवित्र और सत्यदर्शी बने।मंत्रचक्षुर्यज्ञेन कल्पताम्।— यजुर्वेद 11.84भावार्...

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दान अर्थात् क्या? उसका महत्त्व क्या है? By Nitya Oswal

दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह।किसी भी दूसरे जीव को, चाहे वो मनुष्य हो या दूसरे कोई प्राणी, उन्हें सुख देना वह दान कहलाता है। हमारे पास जो भी है, उसे द...

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सत्य की खोज : मनुष्य सृष्टि और आत्मबोध By Chandni choudhary

सत्य की खोज : मनुष्य, सृष्टि और आत्मबोधएक दार्शनिक चिंतनलेखिका — चाँदनीजन्म से मृत्यु तक चलने वाली इस यात्रा में मनुष्य असंख्य कर्म करता है। वह हँसता है, रोता है, प्रेम करता है, सं...

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मृत्यु के बाद क्या होता है ? By Nitya Oswal

मृत्यु के बाद आत्मा एक देह छोड़ता है और दूसरी तरफ़ जहाँ पिता का वीर्य और माता का रज दोनों के इकट्ठा होने का संजोग हो वहाँ सीधे ही गर्भ में प्रवेश करता है। तो हमें प्रश्न होता है कि न...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 29 By Nitya Oswal

भारत के महाराष्ट्र के चौदहवीं शताब्दी के परम सिद्ध, विद्रोही और वारकरी संप्रदाय के महान संत चोखामेला जी की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रसिद्ध अमृत वाणी (अभंग) यहाँ दी गई है। यह वाणी...

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राधा रानी की कृपा By palak baisla

बरसाना में यमुना किनारे सावित्री नाम की एक बूढ़ी मैया रहती थी। उसका इस संसार में कोई नहीं था। पति बहुत साल पहले गुजर गए थे, बच्चे नहीं थे। उसका बस एक ही सहारा था, एक ही परिवार था -...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 37 By Shiv putri

प्रिया ,अनिरुद्ध और सार्थक की बात सुन चुकी थी उसके पैरों तले जमीन खिसक गई )(ये बात सुन के प्रिया की आंखों में अनकहा गुस्सा था उसे खुद नहीं पता था कि उसे गुस्सा क्यो आ रहा है )सार्थ...

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जब राधा रानी ने किया चमत्कार By palak baisla

वृंदावन में यमुना किनारे मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। मीरा को बचपन से ही राधा रानी से बहुत प्रेम था। वह हर दिन सुबह उठकर यमुना में स्नान करती और फिर राधा-कृष्ण के मंदिर में फूलों...

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नुआखाई (पर्व नहीं एक एहसास) By Anamika

स्मृतियों की थाली में नुआखाई का नवान्न :​भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पंचमी (गणेश चतुर्थी के अगले दिन) जब भी करीब आती है, हवा में एक सोंधी सी खुशबू घुलने लगती है। पश्चिमी ओडिशा का यह...

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कालू की पहाड़ी - 17 By RAAHULL SHARMA

पहाड़ी पर मौत का सन्नाटा और कालू का अट्टहास गूँज रहा था। दीपक और अभिलाषा कांपते हुए कातिलों की भूमिका निभा रहे थे, लेकिन तभी कार्तिक के मुँह से निकली बात ने सबको सुन्न कर दिया।कार्...

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जब भोले बाबा ने दिया वरदान By palak baisla

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प्रतीकोपासना - भाग 4 By kalpesh

प्रतीकोपासना :- संपूर्ण साधना का क्रमभाग ४ : स्वप्रतीक से चिदाकाश तकअब तक हमने प्रतीकोपासना के तीन प्रमुख चरणों को समझा है। पहले चरण में साधक अपने ही प्रतिबिंब को स्वप्रतीक बनाकर उ...

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समकालीन अद्वैत का सच: संस्था नहीं, साक्षी। By Vedanta Life Agyat Agyani

 समकालीन अद्वैत वेदान्त का दार्शनिक विश्लेषण: संस्थागत ढाँचे, तार्किक व्याख्याएँ और 'वेदान्त 2.0' का शून्य-बिंदु चेतना सिद्धांतअद्वैत वेदान्त की शास्त्रीय उपनिषदीय परंपरा म...

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फल से कारण तक - रूप के पार निराकार सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

        अध्याय : फल से कारण तक — रूप के पार निराकार सत्यबीज-वाक्य  “फल को मत पकड़ो, कारण तक जाओ।रूप को देखो, पर रूप को अंतिम सत्य मत मानो।”               1. धर्म की पहली भूल — फल क...

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जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है कर्म से दृष्टा तक By Vedanta Life Agyat Agyani

जो हो रहा है, अच्छा हो रहा हैकर्म से दृष्टा तक लेखक : Agyat Agyani प्रस्तावना — पहला सारयह पुस्तक किसी मत को स्थापित करने के लिए नहीं है। यह घटना को घटना की तरह देखना सिखाने के लिए...

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Zinagi 2.0 By Swarnima Varshney

काश कुछ ऐसा हो जाए… जो दिल को चाहिए, वही मिल जाए। कितनी खुशी होगी ना, कुछ पलों के लिए… पर ये दिल कहाँ ठहरता है एक पल के लिए। ऐसा लगता है कि जो है उसमें कुछ अधूरा है। जो मिल जाए, तो...

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एकनिष्ठ भक्ति By Shivam Kumar Pandey

 ।। धर्म कभी भी वंशानुगत नहीं होता ।। आस्था में स्पष्टता, आराध्य के प्रति निष्ठा और धार्मिक पहचान का प्रश्नएक मौलिक वैचारिक पुस्तकलेखक: Shivam Kumar Pandey इस पुस्तक का उद्देश्य अप...

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सत्य की पहली धड़कन By Vedanta Life Agyat Agyani

  1. पुस्तक विवरण - Description   Vedanta 2.0 : सत्य की पहली धड़कन   सत्य कहाँ है - बाहर दिखाई देने वाले जगत में, या उस चेतना में जिसके कारण यह जगत दिखाई देता है?   मनुष्य ने इस प्...

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प्रथमाष्टमी By Anamika

​मार्गशीर्ष का महीना जब भी आता है, मेरी स्मृतियों के आँगन में हल्दी के पत्तों की वह सोंधी खुशबू तैरने लगती है। बचपन से लेकर शादी से पहले तक, यह महीना मेरे लिए किसी उत्सव से कम नहीं...

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क्या भाग्य सच में होता है? By Nitya Oswal

हाँ, भाग्य है; वह सच में है! भाग्य कैसे सच है यह जानने के लिए, आइए वास्तविक जीवन के कुछ उदाहरण देखते हैं, शुरुआत आपके 'खुद' के जीवन से करते हैं। भाग्य के वास्तविक जीवन के उ...

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जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है? By yeash shah

_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मंत्रों में जप मंत्र मेरा ही स्वरूप है। जप का अर्थ है नित्य अपने अंतर में किसी एक विशेष संकल्प को दोहर...

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रामायण हमें क्या सिखाती है? By Skp divine

रामायण हमें क्या सिखाती है?एक महान ग्रंथ, जो मनुष्य को प्रेम, मर्यादा और धर्म का मार्ग दिखाता हैरामायण केवल एक प्राचीन कथा नहीं है।यह भारतीय संस्कृति की उन महान आध्यात्मिक और साहित...

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विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4 By Shivam Kumar Pandey

हम सभी विष्णु सरनेम के लोग, सनातन धर्म के अनुयायी हैं, और और हम हिंदुओं से अलग नहीं बल्कि हम भी हिंदू हैं । किसी भी प्रकार से हम हिंदुओं से अलग नहीं हैं ।परिचयभारत एक प्राचीन और मह...

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सत्य की ज्ञान-यात्रा - अध्याय 1 By Chandni choudhary

सत्य की ज्ञान-यात्राअभ्यनव और गुरुदेव वाजदेव ऋषि की दार्शनिक कथावन की शांत गोद में गुरुदेव वाजदेव ऋषि अपनी कुटिया के बाहर ध्यानमग्न बैठे थे। संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे अस्ता...

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तीन समस्याएं, पीड़ा का कारण और निवारण। By yeash shah

समाज की तीन समस्याएं और पीड़ा का कारण।(अ) घर में लगातार बीमारी रहना और मेडिकल का खर्च।(ब) प्रगतिशील व्यवसाय या नौकरी का अचानक कम या बंद हो जाना।(क) रिश्तों में मनभेद और अलग हो जाने...

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गरीब किसान की मेहनत और राम की लगन By Tejpal Singh Meena

मोहन एक गरीब परिवार का सीधा वक्ति हैं वह उत्तर प्रदेश मुरादाबाद के एक छोटे से गांव अमरपुर में रहता है मोहन के परिवार में चार सदस्य रहते हैं उसकी पत्नी सरोज जो घर का सारा काम करती ह...

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मेरा काम हो गया - एक जागृति कथा By prem chand hembram

पुरुलिया जिले के रूकनी गाँव के समीप हारु कमार का घर था। मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और बाँस का दरवाजा—बस यही उसकी गृहस्थी की पहचान थी।बात सन 1976 की है।हारु ने जब से होश सँभाला, त...

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श्रोत्रं यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(14) की व्याख्या "श्रोत्रंयज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/81भावार्थ--हमारे कान शुभ वचनों को ग्रहण करने वालेबनें।वेदों में प्रमाण--“हमारे कान शुभ/कल्याणकारी वचन सुनें और...

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शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है। By Vedanta Life Agyat Agyani

  शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है।जब मन कहता है—“कृष्ण ऐसे थे।”“बुद्ध ऐसे थे।”“राम ऐसे थे।”तो वह प्रायः इतिहास, स्मृति और किसी दूसरे के अनुभव को दोहरा रहा होता है...

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मैं हूँ - लेकिन कर्ता नहीं By Vedanta Life Agyat Agyani

  0 — कर्ता का अंत, होना शेष0 केवल शांति नहीं है।0 केवल विचारों का रुक जाना नहीं है।0 केवल ध्यान में बैठ जाना नहीं है।0 का मूल अर्थ है—कर्ताभाव का गिर जाना।मैं हूँ।बस हूँ।बाकी सब ह...

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उत्तर बेचने वाले गुरु और खोता हुआ प्रश्न By Vedanta Life Agyat Agyani

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चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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दान अर्थात् क्या? उसका महत्त्व क्या है? By Nitya Oswal

दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह।किसी भी दूसरे जीव को, चाहे वो मनुष्य हो या दूसरे कोई प्राणी, उन्हें सुख देना वह दान कहलाता है। हमारे पास जो भी है, उसे द...

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सत्य की खोज : मनुष्य सृष्टि और आत्मबोध By Chandni choudhary

सत्य की खोज : मनुष्य, सृष्टि और आत्मबोधएक दार्शनिक चिंतनलेखिका — चाँदनीजन्म से मृत्यु तक चलने वाली इस यात्रा में मनुष्य असंख्य कर्म करता है। वह हँसता है, रोता है, प्रेम करता है, सं...

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मृत्यु के बाद आत्मा एक देह छोड़ता है और दूसरी तरफ़ जहाँ पिता का वीर्य और माता का रज दोनों के इकट्ठा होने का संजोग हो वहाँ सीधे ही गर्भ में प्रवेश करता है। तो हमें प्रश्न होता है कि न...

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