आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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श्रापित एक प्रेम कहानी - 86 By CHIRANJIT TEWARY

निलु के उपर आलोक दवाब बनाते हुए पूछता है:" निलु काका अब बोलिए क्या बात है। आप डरीये मत । हो सकता है इसमे हम आपकी कोई सहायता कर सके। आप हमे बेखोफ होकर बोलिए । "निलु के पास अब कोई चा...

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महाभारत की कहानी - भाग 244 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४८ युधिष्ठिर का सशरीर स्वर्गारोहण   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की ध...

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परिश्रम का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(3) की व्याख्या "न ऋते श्रान्तस्य सख्यायदेवा:"4/33/11भावार्थ -देवता(ईश्वर) श्रम करने वाले के सिवा और से मित्रता नहीं ‌करते।ऋग्वेद 4.33.11 का अंश:न ऋते श्रान्तस्य सख्या...

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साथ साथ चलो साथ साथ बोलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(4) की व्याख्या ऋगुवेद--10/191/2सं गच्छव्व सं वदध्वंभावार्थ--साथ-साथचलो, साथ ऋग्वेद 10.191.2 का मंत्र है:संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।देवा भागं यथा पूर्वे...

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स्वर्ग का दरवाजा - 5 By Author Pawan Singh

एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते।  ये लाइन तो आपने सुनी ही होगी लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या ये दर्शाता है कि दोस्ती में लिंग भेदभाव होता है या प्यार की भावना दोस्ती क...

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शैतानी घाटी का सफर - 4 By RAAHULL SHARMA

ड्राइवर की सीट पर कालू बैठा था, लेकिन उसका चेहरा बिल्कुल सपाट था, जैसे वो किसी बेहोशी में हो।उसने गाड़ी का गियर डाला और बस तेज़ी से एक दूसरी भयानक और गहरी खाई की तरफ भगाने लगा।राम:...

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जो जागे वह पाए By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति --(5) की व्याख्या "यो जागार तमृच: कामयन्ति"ऋग्वेद--5/44/14भावार्थ --जो जागता है उसे ऋचाएँ चाहती हैं।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 5.44.14 का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

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मुक्ति का पंचनीति मार्ग By prem chand hembram

मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सामान्यतः लोग मुक्ति को मृत्...

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कालू की पहाड़ी - 5 By RAAHULL SHARMA

कार्तिक और रूही अपने साथ तीन पवित्र चीज लेकर आए थे, एक तो भगवान शंकर का पवित्र त्रिशूल।दूसरा जब वह मनाली के शिव मंदिर में गए थे तब वहां से भगवान शंकर की जटाओं, में से जो जल नीचे गि...

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सन्मार्ग की ओर By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या "अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ले चलें।ऋग्वेद 1.189.1अग्ने नय सुपथा राये अस्म...

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मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति: भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा By prem chand hembram

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति — भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। किंतु मुक्ति का अर्थ केवल संसार का त्या...

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अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 1 By RAAHULL SHARMA

अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्यछत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहा...

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ईश्वर-सखा कभी हारता नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (7) की व्याख्या "न यस्य हन्यते सखा न जीयते ऋगुवेद- --10/152/1भावार्थ --हे प्रभु! आपके भक्त को न कोई नष्ट कर सकता है और न जीत सकता है। इस  मंत्र का पूरा श्ल़ोक अर्थ...

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ईश्वर की महिमा अनन्त By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (8) की व्याख्या "न विन्धेश्य सुष्टतिम"ऋगुवेद --1/1/7भावार्थ --मै स्तुति से पार नहीं पा सकता। उद्धृत मन्त्र ऋग्वेद 1.7.7 का है। सही पाठ इस प्रकार है—तुञ्जे-तुञ्जे य...

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ईश्वर को हम नहीं छोड़ सकते By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (9) की व्याख्या "महे चन त्वामंद्रिव:परां शुल्काय देयाम्"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ --हे ईश्वर ! मैं ‌आपको  किसी भी मूल्य पर नहीं छोड़ सकता।मंत्र का पदानुसार अर्थ इस प्रक...

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ईश्वर मेरा चरवाह है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (10)की व्याख्या "न रिष्येत त्यावत: सखा"ऋगुवेद --1/91/8भावार्थ --हे ईश्वर !आपका सखा (भक्त) कभी‌नष्ट नहीं होता। ऋग्वेद १।९१।८ का पूरा मंत्र इस प्रकार है —त्वं नः सोम...

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समस्त लोकों का राजा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(11)की व्याख्या "एको विश्वस्य भुवनस्य राजा"ऋगुवेद --6/36/4भावार्थ -समस्त लोकों का वह‌ स्वामी एक है।इसका पूरा मंत्र अर्थ‌ सहितऋग्वेद ६.३६.४ का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

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God Wishar - 6 By Ram Make

"अरे वाह!" मेयर साहब ने उत्सुकता से कहा, "कबीर, मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे अंदर इतने सारे हुनर छिपे हैं। लगता है आज हमारी किस्मत अच्छी है।"यहाँ तक कि शिवानी ने भी आँखों में थोड़ी...

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तू मेरा मैं तेरा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१२) की‌ व्याख्या- “त्वमस्माकं तव स्मसि”ऋगुवेद --८/९२/३२भावार्थ --प्रभु ! तू हमारा है हम‌ तेरे‌ हैं।यह आत्मसमर्पण, आश्रय और दिव्य–संबंध का उद्घोष है।ऋग्वेद ८।९२।३२ का...

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आत्मा की यात्रा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१३) की व्याख्या अधाम इन्द्र श्रणवो हवेमा — ऋग्वेद ७/२९/३भावार्थ --हे प्रभो ! हमारी पुकार को‌ सुनो।पदच्छेद--अधाम । इन्द्र । श्रणवः । हवेमा ॥शब्दार्थअधाम — हम नीचे (...

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महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

महाभारत भीतर का युद्ध (तत्व मीमांसा) — भाग : ०१ मनुष्य सदियों से भगवान को खोज रहा है।कभी मंदिरों में,कभी तीर्थों में,कभी मूर्तियों में,कभी ग्रंथों में।पर शायद सबसे कठिन खोज अपने भी...

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आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्या ऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)  भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना  वेद-मंत्रों का पाठ व्यर्थ है।ऋग्वेद १.१६४.३९ऋचो अ...

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

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उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है । हमे जल्दी से अघोरी बाबा के पास जाना चाहिए । और उनसे इन देत्यो से हमेशा की छुटकारा पाने का कोई उपाय प...

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जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

 अध्याय: जीवन का रहस्य जीवन कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान खोजना हो। जीवन स्वयं एक रहस्य है, जिसे जीना है।स्त्री और पुरुष दोनों इस रहस्य के दो अंग हैं। स्त्री प्रकृति है — तरल, प्...

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दान देने से धन नहीं घटता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्त.(१७) की व्याख्या मन्त्र — ऋग्वेद १०/११७/१उतो रयिः पृणतो नो पदस्यति।भावार्थ -दान करने वाले का धन नहीं घटता। पदच्छेद--उत + उ + रयिः + पृणतः + नः + पदस्यति शब्दार्थउत &#6...

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जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

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जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

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बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें? By Nitya Oswal

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 86 By CHIRANJIT TEWARY

निलु के उपर आलोक दवाब बनाते हुए पूछता है:" निलु काका अब बोलिए क्या बात है। आप डरीये मत । हो सकता है इसमे हम आपकी कोई सहायता कर सके। आप हमे बेखोफ होकर बोलिए । "निलु के पास अब कोई चा...

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महाभारत की कहानी - भाग 244 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४८ युधिष्ठिर का सशरीर स्वर्गारोहण   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की ध...

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परिश्रम का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(3) की व्याख्या "न ऋते श्रान्तस्य सख्यायदेवा:"4/33/11भावार्थ -देवता(ईश्वर) श्रम करने वाले के सिवा और से मित्रता नहीं ‌करते।ऋग्वेद 4.33.11 का अंश:न ऋते श्रान्तस्य सख्या...

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स्वर्ग का दरवाजा - 5 By Author Pawan Singh

एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते।  ये लाइन तो आपने सुनी ही होगी लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या ये दर्शाता है कि दोस्ती में लिंग भेदभाव होता है या प्यार की भावना दोस्ती क...

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शैतानी घाटी का सफर - 4 By RAAHULL SHARMA

ड्राइवर की सीट पर कालू बैठा था, लेकिन उसका चेहरा बिल्कुल सपाट था, जैसे वो किसी बेहोशी में हो।उसने गाड़ी का गियर डाला और बस तेज़ी से एक दूसरी भयानक और गहरी खाई की तरफ भगाने लगा।राम:...

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जो जागे वह पाए By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति --(5) की व्याख्या "यो जागार तमृच: कामयन्ति"ऋग्वेद--5/44/14भावार्थ --जो जागता है उसे ऋचाएँ चाहती हैं।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 5.44.14 का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

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मुक्ति का पंचनीति मार्ग By prem chand hembram

मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सामान्यतः लोग मुक्ति को मृत्...

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कालू की पहाड़ी - 5 By RAAHULL SHARMA

कार्तिक और रूही अपने साथ तीन पवित्र चीज लेकर आए थे, एक तो भगवान शंकर का पवित्र त्रिशूल।दूसरा जब वह मनाली के शिव मंदिर में गए थे तब वहां से भगवान शंकर की जटाओं, में से जो जल नीचे गि...

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सन्मार्ग की ओर By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या "अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ले चलें।ऋग्वेद 1.189.1अग्ने नय सुपथा राये अस्म...

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मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति: भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा By prem chand hembram

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति — भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। किंतु मुक्ति का अर्थ केवल संसार का त्या...

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अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 1 By RAAHULL SHARMA

अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्यछत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहा...

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ईश्वर-सखा कभी हारता नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (7) की व्याख्या "न यस्य हन्यते सखा न जीयते ऋगुवेद- --10/152/1भावार्थ --हे प्रभु! आपके भक्त को न कोई नष्ट कर सकता है और न जीत सकता है। इस  मंत्र का पूरा श्ल़ोक अर्थ...

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ईश्वर की महिमा अनन्त By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (8) की व्याख्या "न विन्धेश्य सुष्टतिम"ऋगुवेद --1/1/7भावार्थ --मै स्तुति से पार नहीं पा सकता। उद्धृत मन्त्र ऋग्वेद 1.7.7 का है। सही पाठ इस प्रकार है—तुञ्जे-तुञ्जे य...

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ईश्वर को हम नहीं छोड़ सकते By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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ईश्वर मेरा चरवाह है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (10)की व्याख्या "न रिष्येत त्यावत: सखा"ऋगुवेद --1/91/8भावार्थ --हे ईश्वर !आपका सखा (भक्त) कभी‌नष्ट नहीं होता। ऋग्वेद १।९१।८ का पूरा मंत्र इस प्रकार है —त्वं नः सोम...

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समस्त लोकों का राजा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(11)की व्याख्या "एको विश्वस्य भुवनस्य राजा"ऋगुवेद --6/36/4भावार्थ -समस्त लोकों का वह‌ स्वामी एक है।इसका पूरा मंत्र अर्थ‌ सहितऋग्वेद ६.३६.४ का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

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God Wishar - 6 By Ram Make

"अरे वाह!" मेयर साहब ने उत्सुकता से कहा, "कबीर, मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे अंदर इतने सारे हुनर छिपे हैं। लगता है आज हमारी किस्मत अच्छी है।"यहाँ तक कि शिवानी ने भी आँखों में थोड़ी...

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तू मेरा मैं तेरा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१२) की‌ व्याख्या- “त्वमस्माकं तव स्मसि”ऋगुवेद --८/९२/३२भावार्थ --प्रभु ! तू हमारा है हम‌ तेरे‌ हैं।यह आत्मसमर्पण, आश्रय और दिव्य–संबंध का उद्घोष है।ऋग्वेद ८।९२।३२ का...

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आत्मा की यात्रा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१३) की व्याख्या अधाम इन्द्र श्रणवो हवेमा — ऋग्वेद ७/२९/३भावार्थ --हे प्रभो ! हमारी पुकार को‌ सुनो।पदच्छेद--अधाम । इन्द्र । श्रणवः । हवेमा ॥शब्दार्थअधाम — हम नीचे (...

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महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

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आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्या ऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)  भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना  वेद-मंत्रों का पाठ व्यर्थ है।ऋग्वेद १.१६४.३९ऋचो अ...

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

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उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

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जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

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जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

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जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

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बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

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