आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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महाभारत की कहानी - भाग 233 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३७ धृतराष्ट्र के पास नारद, पर्वत, वेदव्यास और युधिष्ठिरादि का आगमन   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने...

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ईश्वर से मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (२४) की व्याख्या “अघृणे न ते सख्याय पह्युवे” — ऋगुवेद _१/१३८/४भावार्थ --हे प्रभु ! मैं ‌तेरी मित्रता से इन्कार नहीं ‌करता।पदच्छेद-- अघृणे — हे प्रकाशस्वरूप, दयालु (...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 10 By Shivraj Bhokare

दोहा:१९कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।भक्ति करै कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥कथा: "शर्तों वाली भक्ति"एक बहुत बड़ा व्यापारी था, जिसका मन हमेशा मुनाफे और वासनाओं में उलझा रहता था।...

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भय से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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स्वर्ग का दरवाजा - 4 By Author Pawan Singh

बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन?   शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिक इज्जत या ईमानदारी के मुखौटो के पीछे छुपा होता है।  ये बात एलिज़ाबेथ बैरेट ने...

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भक्त को भय नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 80 By CHIRANJIT TEWARY

कुंम्भन जौर जौर से हंसते हुए कहता है।" मृत्यु की तुम परिचय मांग रहे हो मुर्ख । आज तेरा अंतिम रात्री है। और तेरे पास केवल कुछ ही छण शेष है। इससे पूर्व के मैं तुम्हें मृत्यु दंण्ड दू...

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उपकारहीन कृपण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२६) की व्याख्या मंत्र:अपृणन्तिमभि सं यन्ति शोका:।— ऋग्वेद १.१२५.७भावार्थ --उपकारहीन कृपण को शोक घेर लेता है।पदच्छेद--अपृणन्तिम् + अभि + सं + यन्ति + शोकाःशब्दार्थ--...

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सत्य पथ पर चलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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स्वभाव धर्म ओर आत्मा की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

स्वभाव का तात्विक विवेचन: दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक धर्म का एक व्यापक अनुसंधानhttps://orcid.org/0009-0000-8083-0685vedanta 2.0 life - pen name -Agyat agyani—𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲“जो स...

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फल्गु को माता सीता का श्राप By Abhijeet Nayan

फल्गु का रहस्यये कहानी उस समय की है, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दिनों में पृथ्वी पर भटकते हुए गया नगरी पहुँचे थे। गया उस समय भी पवित्र स्थान माना जाता था, जहाँ पित...

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ज्ञानी भ्रमित नहीं होता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२८) की व्याख्या  मन्त्र--“उत देवा अवहित देवा: उन्नदेवा पुनः:”। --ऋग्वेद १०.१३७.१भावार्थ --गिरे हुओं को पुनः उठाओं।यह मन्त्र ऋग्वेद के दशम मण्डल, १३७वें सूक्त का प्र...

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सिंघनी माता का रहस्य - अध्याय 3 By Abhijeet Nayan

सिंघनी माता का रहस्य — अध्याय 3राजेश की बात सुनते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला। तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज गूँजी—“राजेश… क्या तुमने सच मे...

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शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर By Vedanta Life Agyat Agyani

  शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और...

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दुख का कारण 'अति' By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।मंत्र:“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”— ऋग्वेद १/१६४/३२पदच्छेद--बहु-प...

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शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

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भक्त का रक्षक भगवान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (३०) की व्याख्या यह मन्त्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 32, मन्त्र 14) है। यह सूक्त मुख्यतः इन्द्र की स्तुति में है।मन्त्र---कस्तमिन्द्र त्वावसुमा मर्त्यो दधर्षति।(ऋग्वेद...

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स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

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आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

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वेदान्त 2.0 - भाग 39 By Vedanta Life Agyat Agyani

 ,  वेदांत 2.0: 'अज्ञात अज्ञानी' के अस्तित्व-दर्शन और वैज्ञानिक अद्वैत का गहन विश्लेषणआधुनिक दार्शनिक चिंतन के धरातल पर 'वेदांत 2.0' का उद्भव एक ऐसी क्रांतिकारी घटन...

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‌परम शक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (32) की व्याख्या "स्तोतुर्मघवन काममा पृण"। ऋगुवेद ---१/५७/५भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो। मंत्र :“स्तोतुर्मघवन् काममापृण।”— ऋगुवेद --1.57.5पदच्छेद...

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अप्प दीपो भवः...- बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

रांची की वह सुबह आज भी याद है...ठंडी हवा थी...सड़कें धीरे-धीरे जाग रही थीं...और मैं किताबों की तलाश में था।किताबें...जो सिर्फ पन्ने नहीं होतीं...कई बार वे मनुष्य को नया मनुष्य बना...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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Hero - 4 By Ram Make

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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मुक्ति की कामना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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सत्य की खोज By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या "सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।शब्दार्थ--सत्या — सत्य...

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महाभारत की कहानी - भाग 233 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३७ धृतराष्ट्र के पास नारद, पर्वत, वेदव्यास और युधिष्ठिरादि का आगमन   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने...

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ईश्वर से मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (२४) की व्याख्या “अघृणे न ते सख्याय पह्युवे” — ऋगुवेद _१/१३८/४भावार्थ --हे प्रभु ! मैं ‌तेरी मित्रता से इन्कार नहीं ‌करता।पदच्छेद-- अघृणे — हे प्रकाशस्वरूप, दयालु (...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 10 By Shivraj Bhokare

दोहा:१९कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।भक्ति करै कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥कथा: "शर्तों वाली भक्ति"एक बहुत बड़ा व्यापारी था, जिसका मन हमेशा मुनाफे और वासनाओं में उलझा रहता था।...

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भय से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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स्वर्ग का दरवाजा - 4 By Author Pawan Singh

बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन?   शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिक इज्जत या ईमानदारी के मुखौटो के पीछे छुपा होता है।  ये बात एलिज़ाबेथ बैरेट ने...

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ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 80 By CHIRANJIT TEWARY

कुंम्भन जौर जौर से हंसते हुए कहता है।" मृत्यु की तुम परिचय मांग रहे हो मुर्ख । आज तेरा अंतिम रात्री है। और तेरे पास केवल कुछ ही छण शेष है। इससे पूर्व के मैं तुम्हें मृत्यु दंण्ड दू...

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ऋगुवेद सूक्ति--(२६) की व्याख्या मंत्र:अपृणन्तिमभि सं यन्ति शोका:।— ऋग्वेद १.१२५.७भावार्थ --उपकारहीन कृपण को शोक घेर लेता है।पदच्छेद--अपृणन्तिम् + अभि + सं + यन्ति + शोकाःशब्दार्थ--...

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सत्य पथ पर चलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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स्वभाव धर्म ओर आत्मा की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

स्वभाव का तात्विक विवेचन: दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक धर्म का एक व्यापक अनुसंधानhttps://orcid.org/0009-0000-8083-0685vedanta 2.0 life - pen name -Agyat agyani—𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲“जो स...

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फल्गु को माता सीता का श्राप By Abhijeet Nayan

फल्गु का रहस्यये कहानी उस समय की है, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दिनों में पृथ्वी पर भटकते हुए गया नगरी पहुँचे थे। गया उस समय भी पवित्र स्थान माना जाता था, जहाँ पित...

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ज्ञानी भ्रमित नहीं होता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२८) की व्याख्या  मन्त्र--“उत देवा अवहित देवा: उन्नदेवा पुनः:”। --ऋग्वेद १०.१३७.१भावार्थ --गिरे हुओं को पुनः उठाओं।यह मन्त्र ऋग्वेद के दशम मण्डल, १३७वें सूक्त का प्र...

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सिंघनी माता का रहस्य — अध्याय 3राजेश की बात सुनते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला। तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज गूँजी—“राजेश… क्या तुमने सच मे...

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शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

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स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

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आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

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 ,  वेदांत 2.0: 'अज्ञात अज्ञानी' के अस्तित्व-दर्शन और वैज्ञानिक अद्वैत का गहन विश्लेषणआधुनिक दार्शनिक चिंतन के धरातल पर 'वेदांत 2.0' का उद्भव एक ऐसी क्रांतिकारी घटन...

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ऋगुवेद सूक्ति- (32) की व्याख्या "स्तोतुर्मघवन काममा पृण"। ऋगुवेद ---१/५७/५भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो। मंत्र :“स्तोतुर्मघवन् काममापृण।”— ऋगुवेद --1.57.5पदच्छेद...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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Hero - 4 By Ram Make

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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