आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


Categories
Featured Books

सफलता का आधार पुरुषार्थ By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(74) की व्याख्या "तरणि:इत‌ जयति"ऋग्वेद -7/32/9भावार्थ --परिश्रमी ही सफल होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहित--ऋग्वेद मण्डल 7, सूक्त 32, मंत्र 9 का मूल पाठ इस प्रकार है—मा स...

Read Free

गीता आज के इंसान के लिए – (अध्याय -4) By Shivraj Bhokare

------------------------------ अध्याय 4: रिश्ते और अपेक्षाएँ  (संबंधों का भ्रम: प्रेम की शुचिता या व्यापार का खेल?)------------------------------  भाग 1: जिसे तुम प्रेम कहते हो, वह...

Read Free

मा हृणीथा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (72) की व्याख्यामा हृणीथा:ऋग्वेद---8/2/19से ईश्वर ! हमसै रुष्ट मत हों। पूरा श्लोकहाँ, ऋग्वेद 8.2.19 का पूरा मंत्र इस प्रकार है—ओ षु प्र याहि वाजेभिर्मा हृणीथा अभ्यस्म...

Read Free

आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 2 - प्राण प्रतिष्ठा क्या है ? By Janshi Saroha

पिछले अध्याय में हमने सनातन का अर्थ समझा था । उसमें हमने पढ़ा कि मूर्ति पूजा का आध्यात्मिक अर्थ क्या है ? मूर्ति पूजा में हमने प्राण प्रतिष्ठा के विषय में पढ़ा।अब अगर प्राण प्रतिष्...

Read Free

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातें By Jai Krishan

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातेंआज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव, प्रतियोगिता, असुरक्षा या मानसिक अशांति से जूझ रहा है। यही कार...

Read Free

शैतानी घाटी का सफर - 7 By RAAHULL SHARMA

उसके शरीर से सड़ी हुई मांस की गंध आ रही थी। उसके हज़ारों हाथ मकड़ी के जाले की तरह फैले हुए थे, और उन हज़ारों हाथों के बिल्कुल बीच में फंसी हुई थी—मोनिका!मोनिका: (घुटती हुई आवाज़ में) "र...

Read Free

मन की आजादी By Roshnika

सारा की इस मर्मस्पर्शी यात्रा और मन की खोज को समेटती हुई एक कहानी:​

पिंजरे से झील तक:

सारा की मुक्ति​ को बरसों बीत गए थे, लेकिन सारा को याद नहीं आता कि आख़िरी बार उसने खुलकर सां...

Read Free

यूनानी दर्शन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (71) की व्याख्याबृहस्पते अति यदर्यो अराति:ऋगुवेद--2/23/1भावार्थ--हे ईश्वर ! हमें श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करें।आपने जो मंत्र उद्धृत किया है—बृहस्पते अति यदर्यो अरातिर्द्...

Read Free

श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 5 By Janshi Saroha

श्री और हरि आपस में बात कर रहे  थे की तभी हरि का फोन बजा वो वहां से चला गया । श्री ने अपनी दिनचर्या चालू रखते हुए शुर्यनमस्कार(योग)  करना प्रारंभ किया । फोन कट होने के बाद हरि दुबा...

Read Free

महाजनो येन गत:सपन्थ: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (70) की व्याख्या "प्रेहि प्रेहि पथिभि: पूर्व्येभि:"ऋग्वेद --10/14/7भावार्थ --श्रेष्ठ मार्ग  पर आगे बढ़ो।इसका पूरा मंत्र --प्रेहि प्रेहि पथिभिः पूर्व्येभिर्यत्रा नः पू...

Read Free

मैं नहीं, अस्तित्व By Vedanta Life Agyat Agyani

 मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोज  भूमिका↓१. प्रश्नकर्ता कौन है? (अस्तित्व की जिज्ञासा)↓२. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्रश्न का संकट↓३. अस्तित्व का...

Read Free

कालू की पहाड़ी - 8 By RAAHULL SHARMA

कार्तिक ने बहुत ही धीमे लेकिन ठोस स्वर में कहा:"रूही, अब और इंतज़ार करना मौत को दावत देना है।मुझे इसी वक्त कालू के उस पुराने गाँव जाना होगा जो अब जहां हम एक रात रुख चुका है। मुझे उ...

Read Free

शुभ सुनें By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

Read Free

बलं धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

Read Free

ब्रह्म ज्ञान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

Read Free

आश्रम की रामकथा By Kapil Tiwari

मैं ऋषिकेश की सड़कों पर भटक ही रहा था कि अचानक मेरी नज़र एक पोस्टर पर पड़ी और उसे देखकर मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उस पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में ल...

Read Free

मार्ग दर्शक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

Read Free

शुभता की चाह By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

Read Free

स्वर्ग का दरवाजा - 6 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 6 नास्तिकतावाद और भौतिकवादअंते वयम सर्वे कथाः भवें - अंत में हम सब कहानी बन जाते हैं। कहानी से याद आया, एक बार की बात है सभी राक्षस, दैत्य और दानवों ने सोचा कि क्यों न हम...

Read Free

अस्तित्व बनाम दावा (मैं) By Vedanta Life Agyat Agyani

   अस्तित्व बनाम दावा(“मैं”) : कर्ता की समस्या का नया फ्रेममनुष्य सामान्यतः अपनी आध्यात्मिक उलझनों को “आत्मा बनाम अहंकार”, “ज्ञान बनाम अज्ञान”, या “धर्म बनाम अधर्म” की भाषा में समझ...

Read Free

पूर्ण दर्शन और विज्ञान: By Vedanta Life Agyat Agyani

**पूর্ণ दर्शन‑विज्ञान:“ईश्वर पाना” की मानसिकता पर वेदान्तीय और समाज‑मनोवैज्ञानिक समालोचना**प्रस्तावनासमकालीन धार्मिक विमर्श में “ईश्वर को पाना”, “भगवान की प्राप्ति करना”, “मुक्ति ह...

Read Free

दो छोर, एक जीवन By Vedanta Life Agyat Agyani

 परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन परिधि की दोड़ पर आधारित है। हम ऊपर देखने के लिए टेलीस्कोप खोजते हैं, नीचे देखने के लिए ड्रिल बनाते...

Read Free

अभी नहीं..... By prem chand hembram

अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दूर तक शीतल छाया बिखेरती थीं। पक्षियों का कलरव, पत्तों की सरसराहट और उसके नीचे पसरी हुई शांति मानो थके...

Read Free

त्याग नहीं, देखना - द्वैत के पार By Vedanta Life Agyat Agyani

  त्याग नहीं, देखना — द्वैत के पार — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲धर्म की पुरानी भाषा प्रायः कहती रही है —"छोड़ो।"वासना छोड़ो।लोभ छोड़ो।अहंकार छोड़ो।संसार छोड़ो।मानो सत्य किसी त्याग के बाद मिलने व...

Read Free

पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 8 By Sonam Brijwasi

दिन बीतते गए…और कृष्णा ने अब अपनी पूजा-पाठ और बढ़ा दी थी। सुबह मंदिर…घर में मंत्र…रात को रामायण का पाठ…जैसे वो हर पल सिद्धिका के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना रहा हो।सिद्धिका अब पहल...

Read Free

श्रापित एक प्रेम कहानी - 90 By CHIRANJIT TEWARY

होटल मालिक के इस तरह से कहने पर एकांश को गुस्सा आ जाता है एकांश गुस्से से होटल मालिक से कहता है:" वरना क्या ...! क्या कर लोगे ।" एकांश मांतक से कहता है :" अंकल आपका कितना बिल हुआ ह...

Read Free

यह किताब नहीं है By Vedanta Life Agyat Agyani

 "यह किताब नहीं है"  अध्याय 1: उधार का बोझ — हम कैसे फँसे?कहाँ से शुरू हुआ:बच्चा पैदा होता है — खाली। फिर माँ-बाप, स्कूल, समाज, धर्म सब मिलकर उसके खालीपन पर लिखना शुरू करते हैं। ना...

Read Free

आलस्य मत करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (68) की व्ययाख्य "मां सेधत"ऋग्वेद --7/32/9भावार्थ --आलस्य मत कऱो।पूरा मंत्र  अर्थ ऋग्वेद 7.32.9 का मंत्र इस प्रकार है—मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे।त...

Read Free

कर्मठ बनो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (67)की व्याख्या"दक्षता महे"ऋगुवेद-7/32/9भावार्थ--दक्ष बनो। पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 7.32.9 का मूल मंत्र इस प्रकार है—मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे...

Read Free

मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

Read Free

महाभारत की कहानी - भाग 246 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२५० कौरव और पांडवों के स्वर्गलाभ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्...

Read Free

श्रेष्ठ लोगों की संगति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (66) की व्याख्या "देवानाम् सख्यमुप सेदिमा वयम्।ऋग्वेद --1/89/3भावार्थ - हम श्रेष्ठ लोगों की संगति प्राप्त करें। "देवानां सख्यमुप सेदिमा वयम्") ऋग्वेद के मंत्र का वास्...

Read Free

मित्र कौन ? By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या "न स सखा यो न ददाति  सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्थ -- ,वह मित्र‌ नहीँ है जो सहायता न करें।पूरा मंत्र अर्थ सहितआपने जो पंक्ति उद्धृत की है — “न स सखा...

Read Free

मॉडर्न साधु - 1 By aman

ये कहानी शुरू होती हैं अस्पताल से....जहां मोहन अपने होने वाले बच्चे के लिए चिंतित हैं। ऑपरेशन रूम से आती दर्द भरी चीखों ने उसे परेशान कर दिया हैं चिंता ने उसके बच्चे पैदा होने की ख...

Read Free

तुरीय-आधारित '0 बोध' By Vedanta Life Agyat Agyani

।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – "वेदांत 2.0 लाइफ़" नामक एक समेकित फ्रेम...

Read Free

सफलता का आधार पुरुषार्थ By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(74) की व्याख्या "तरणि:इत‌ जयति"ऋग्वेद -7/32/9भावार्थ --परिश्रमी ही सफल होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहित--ऋग्वेद मण्डल 7, सूक्त 32, मंत्र 9 का मूल पाठ इस प्रकार है—मा स...

Read Free

गीता आज के इंसान के लिए – (अध्याय -4) By Shivraj Bhokare

------------------------------ अध्याय 4: रिश्ते और अपेक्षाएँ  (संबंधों का भ्रम: प्रेम की शुचिता या व्यापार का खेल?)------------------------------  भाग 1: जिसे तुम प्रेम कहते हो, वह...

Read Free

मा हृणीथा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (72) की व्याख्यामा हृणीथा:ऋग्वेद---8/2/19से ईश्वर ! हमसै रुष्ट मत हों। पूरा श्लोकहाँ, ऋग्वेद 8.2.19 का पूरा मंत्र इस प्रकार है—ओ षु प्र याहि वाजेभिर्मा हृणीथा अभ्यस्म...

Read Free

आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 2 - प्राण प्रतिष्ठा क्या है ? By Janshi Saroha

पिछले अध्याय में हमने सनातन का अर्थ समझा था । उसमें हमने पढ़ा कि मूर्ति पूजा का आध्यात्मिक अर्थ क्या है ? मूर्ति पूजा में हमने प्राण प्रतिष्ठा के विषय में पढ़ा।अब अगर प्राण प्रतिष्...

Read Free

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातें By Jai Krishan

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातेंआज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव, प्रतियोगिता, असुरक्षा या मानसिक अशांति से जूझ रहा है। यही कार...

Read Free

शैतानी घाटी का सफर - 7 By RAAHULL SHARMA

उसके शरीर से सड़ी हुई मांस की गंध आ रही थी। उसके हज़ारों हाथ मकड़ी के जाले की तरह फैले हुए थे, और उन हज़ारों हाथों के बिल्कुल बीच में फंसी हुई थी—मोनिका!मोनिका: (घुटती हुई आवाज़ में) "र...

Read Free

मन की आजादी By Roshnika

सारा की इस मर्मस्पर्शी यात्रा और मन की खोज को समेटती हुई एक कहानी:​

पिंजरे से झील तक:

सारा की मुक्ति​ को बरसों बीत गए थे, लेकिन सारा को याद नहीं आता कि आख़िरी बार उसने खुलकर सां...

Read Free

यूनानी दर्शन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (71) की व्याख्याबृहस्पते अति यदर्यो अराति:ऋगुवेद--2/23/1भावार्थ--हे ईश्वर ! हमें श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करें।आपने जो मंत्र उद्धृत किया है—बृहस्पते अति यदर्यो अरातिर्द्...

Read Free

श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 5 By Janshi Saroha

श्री और हरि आपस में बात कर रहे  थे की तभी हरि का फोन बजा वो वहां से चला गया । श्री ने अपनी दिनचर्या चालू रखते हुए शुर्यनमस्कार(योग)  करना प्रारंभ किया । फोन कट होने के बाद हरि दुबा...

Read Free

महाजनो येन गत:सपन्थ: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (70) की व्याख्या "प्रेहि प्रेहि पथिभि: पूर्व्येभि:"ऋग्वेद --10/14/7भावार्थ --श्रेष्ठ मार्ग  पर आगे बढ़ो।इसका पूरा मंत्र --प्रेहि प्रेहि पथिभिः पूर्व्येभिर्यत्रा नः पू...

Read Free

मैं नहीं, अस्तित्व By Vedanta Life Agyat Agyani

 मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोज  भूमिका↓१. प्रश्नकर्ता कौन है? (अस्तित्व की जिज्ञासा)↓२. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्रश्न का संकट↓३. अस्तित्व का...

Read Free

कालू की पहाड़ी - 8 By RAAHULL SHARMA

कार्तिक ने बहुत ही धीमे लेकिन ठोस स्वर में कहा:"रूही, अब और इंतज़ार करना मौत को दावत देना है।मुझे इसी वक्त कालू के उस पुराने गाँव जाना होगा जो अब जहां हम एक रात रुख चुका है। मुझे उ...

Read Free

शुभ सुनें By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

Read Free

बलं धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

Read Free

ब्रह्म ज्ञान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

Read Free

आश्रम की रामकथा By Kapil Tiwari

मैं ऋषिकेश की सड़कों पर भटक ही रहा था कि अचानक मेरी नज़र एक पोस्टर पर पड़ी और उसे देखकर मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उस पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में ल...

Read Free

मार्ग दर्शक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

Read Free

शुभता की चाह By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

Read Free

स्वर्ग का दरवाजा - 6 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 6 नास्तिकतावाद और भौतिकवादअंते वयम सर्वे कथाः भवें - अंत में हम सब कहानी बन जाते हैं। कहानी से याद आया, एक बार की बात है सभी राक्षस, दैत्य और दानवों ने सोचा कि क्यों न हम...

Read Free

अस्तित्व बनाम दावा (मैं) By Vedanta Life Agyat Agyani

   अस्तित्व बनाम दावा(“मैं”) : कर्ता की समस्या का नया फ्रेममनुष्य सामान्यतः अपनी आध्यात्मिक उलझनों को “आत्मा बनाम अहंकार”, “ज्ञान बनाम अज्ञान”, या “धर्म बनाम अधर्म” की भाषा में समझ...

Read Free

पूर्ण दर्शन और विज्ञान: By Vedanta Life Agyat Agyani

**पूর্ণ दर्शन‑विज्ञान:“ईश्वर पाना” की मानसिकता पर वेदान्तीय और समाज‑मनोवैज्ञानिक समालोचना**प्रस्तावनासमकालीन धार्मिक विमर्श में “ईश्वर को पाना”, “भगवान की प्राप्ति करना”, “मुक्ति ह...

Read Free

दो छोर, एक जीवन By Vedanta Life Agyat Agyani

 परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन परिधि की दोड़ पर आधारित है। हम ऊपर देखने के लिए टेलीस्कोप खोजते हैं, नीचे देखने के लिए ड्रिल बनाते...

Read Free

अभी नहीं..... By prem chand hembram

अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दूर तक शीतल छाया बिखेरती थीं। पक्षियों का कलरव, पत्तों की सरसराहट और उसके नीचे पसरी हुई शांति मानो थके...

Read Free

त्याग नहीं, देखना - द्वैत के पार By Vedanta Life Agyat Agyani

  त्याग नहीं, देखना — द्वैत के पार — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲धर्म की पुरानी भाषा प्रायः कहती रही है —"छोड़ो।"वासना छोड़ो।लोभ छोड़ो।अहंकार छोड़ो।संसार छोड़ो।मानो सत्य किसी त्याग के बाद मिलने व...

Read Free

पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 8 By Sonam Brijwasi

दिन बीतते गए…और कृष्णा ने अब अपनी पूजा-पाठ और बढ़ा दी थी। सुबह मंदिर…घर में मंत्र…रात को रामायण का पाठ…जैसे वो हर पल सिद्धिका के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना रहा हो।सिद्धिका अब पहल...

Read Free

श्रापित एक प्रेम कहानी - 90 By CHIRANJIT TEWARY

होटल मालिक के इस तरह से कहने पर एकांश को गुस्सा आ जाता है एकांश गुस्से से होटल मालिक से कहता है:" वरना क्या ...! क्या कर लोगे ।" एकांश मांतक से कहता है :" अंकल आपका कितना बिल हुआ ह...

Read Free

यह किताब नहीं है By Vedanta Life Agyat Agyani

 "यह किताब नहीं है"  अध्याय 1: उधार का बोझ — हम कैसे फँसे?कहाँ से शुरू हुआ:बच्चा पैदा होता है — खाली। फिर माँ-बाप, स्कूल, समाज, धर्म सब मिलकर उसके खालीपन पर लिखना शुरू करते हैं। ना...

Read Free

आलस्य मत करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (68) की व्ययाख्य "मां सेधत"ऋग्वेद --7/32/9भावार्थ --आलस्य मत कऱो।पूरा मंत्र  अर्थ ऋग्वेद 7.32.9 का मंत्र इस प्रकार है—मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे।त...

Read Free

कर्मठ बनो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (67)की व्याख्या"दक्षता महे"ऋगुवेद-7/32/9भावार्थ--दक्ष बनो। पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 7.32.9 का मूल मंत्र इस प्रकार है—मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे...

Read Free

मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

Read Free

महाभारत की कहानी - भाग 246 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२५० कौरव और पांडवों के स्वर्गलाभ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्...

Read Free

श्रेष्ठ लोगों की संगति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (66) की व्याख्या "देवानाम् सख्यमुप सेदिमा वयम्।ऋग्वेद --1/89/3भावार्थ - हम श्रेष्ठ लोगों की संगति प्राप्त करें। "देवानां सख्यमुप सेदिमा वयम्") ऋग्वेद के मंत्र का वास्...

Read Free

मित्र कौन ? By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या "न स सखा यो न ददाति  सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्थ -- ,वह मित्र‌ नहीँ है जो सहायता न करें।पूरा मंत्र अर्थ सहितआपने जो पंक्ति उद्धृत की है — “न स सखा...

Read Free

मॉडर्न साधु - 1 By aman

ये कहानी शुरू होती हैं अस्पताल से....जहां मोहन अपने होने वाले बच्चे के लिए चिंतित हैं। ऑपरेशन रूम से आती दर्द भरी चीखों ने उसे परेशान कर दिया हैं चिंता ने उसके बच्चे पैदा होने की ख...

Read Free

तुरीय-आधारित '0 बोध' By Vedanta Life Agyat Agyani

।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – "वेदांत 2.0 लाइफ़" नामक एक समेकित फ्रेम...

Read Free